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Talk to some teachers, students, social workers on Education
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शिक्षा सपान के जो कार्यकर्ता है और जो हमारे साथ एसोसिएट होकर जो काम कर रहे हैं हमारा जो पूरा ट्रांजेक्टरीज केशन के ऊपर है शिक्षा के ऊपर है तो उसकी समस्याए जो है उनको अपने को आइडेंटिफिकेशन इंस्टिट्यूट से निकले हुए हैं अपने अपने समय में पढ़ कर के तो समस्याए आपको पता भी होंगी अच्छी तरीके से लेकिन दो तीन बड़ी ज्वलंत समस्या इस समय में है एक है अपनी कंप्यूटर टेक्नोलॉजी जिसको आजकल व एआई एआई एआई बोलना शुरू लोगों ने किया है तो मैं तो जब प्लेन का टिकट वे खरीदता हूं तो सोचता हूं हमारे यहां तो एआई बहुत जमाने से चली आ रही है एयर इंडिया में हम लोग बहुत दिन से सफर करते रहे हैं लेकिन एआई शब्द जो है तो शायद एयर इंडिया का प्रचार भी कर रहा होगा लोगों के दिमाग में एआई ए आई इतना घुसेगा कि जब वो जाएंगे टिकट खरीदने के लिए तो एआई वाला पहले खरीदेंगे तो उनका भी शायद कुछ इसमें से कुछ अच्छा ही होगा उनके लिए तो ये एक गंभीर समस्या है पूरे देश के लिए और हमारे एजुकेशन के लिए क्योंकि एआई के सिस्टम में जितना इंफॉर्मेशन है उपलब्ध कराया गया जितना इंफॉर्मेशन विभिन्न लोगों के द्वारा उपलब्ध किया गया है कराया गया है उन सबको मिला कर के वो एआई चलती है उसके आधार के ऊपर उसकी लर्निंग होती है एआई की अपनी लर्निंग होती है और उसके आधार के ऊपर वह दूसरों को लर्न कराती है मुख्य रूप से ऐसा है तो इसके अंदर में दो तीन प्रश्न बड़े नाजुक प्रश्न खड़े होते हैं एक तो प्रश् उसको तो आप भूल ही जाए कि एआई का उपयोग करके और लोग तरह तरह के घोटाले कर रहे हैं तरह तरह के वो सब कर रहे हैं लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं उनकी आवाज के अंदर में दूसरों को संदेश पहुंचा रहे हैं फिरौती मांगने के लिए वो सब तो एक अलग प्रकार की समस्या है उस पर मैं बात नहीं करूंगा कि वो मेरा क्षेत्र नहीं है हमारा क्षेत्र नहीं है लेकिन बड़ी चीज क्या है कि ज्ञान का निर्माण होना यह बाधित हो रहा है ज्ञान का विकास होना ये बाधित हो रहा है ज्ञान का विकास कैसे होता है जो एसिस्टिंग ज्ञान है उसमें से कुछ उसके डेटा एनालिसिस वगैरह करके कु स्टेटिस्टिक्स करके और कुछ निकाल पिकाल करके उससे ज्ञान का विकास नहीं हो रहा उस ज्ञान का हम इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन ज्ञान का विकास तब होता है जब हम कुछ सोचते हैं जब कुछ हम विचार करते हैं ओरिजिनल थिंकिंग करते हैं तो ये जो सोचते हैं हम हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी जो जरूरत है और जो उसका उद्देश्य है वो यही है कि हम अपने जो हमारे विद्यार्थी आते हैं उस सिस्टम से गुजरते हैं उनमें वह सोचने की क्षमता विकसित करे उनमें वो य एक नया कुछ अपनी तरफ से भी सोच रहे हैं जो बाकी के लोग कह रहे हैं हमारे शिक्षक कह रहे हैं हमारी किताबें कह रही है वो तो कह रहे हैं वो तो हम जान रहे हैं हम समझ रहे हैं वो तो एक पार्ट है उसका लेकिन उससे कुछ आगे दुनिया नहीं बढ़ने वाली है उससे भारत आगे बढ़ने वाला नहीं है वो तो ऑलरेडी इंफॉर्मेशन है उसको हमने जाना बाकी क इतने सारे लोग जानते हैं हम भी जान गए उससे हमारे देश का कोई ऐसा निर्माण होने वाला या कुछ परिवर्तन होने वाला है कुछ हम आगे बढ़ने वाले उसी से नहीं है तो अपनी को सोचने की क्षमता विकसित होनी चाहिए और है हमारे सिस्टम के अंदर में हमेशा से रहा है स्कूल्स कॉलेजेस के अंदर में हम लोग बनाते हैं हम लोगों को होमवर्क मिलते हैं होमवर्क करते हैं फिर हम वापस देते हैं उस पर लोग हमारे शिक्षक जो है वो सही का निशान लगाते हैं हमें बड़ी खुशी होती है क्रॉस का निशान लगाते हैं तो फिर हम दोबारा पढ़ते हैं यह करते हैं वो करते हैं फिर जो स सवाल पूछे जाते हैं परीक्षाओं के अंदर में सवाल पूछा जाते हैं उनके अंदर में भी कुछ जरूर इस प्रकार से जो शिक्षाविद लोग हैं वो कहते हैं क्वेश्चन पेपर कैसा बनना चाहिए क्या होना चाहिए तो उसके अंदर में कौन सी टेक्सोनोमी और वगैरह वगैरह सब होते हैं उसके अंदर में होते हैं कि हा एक ऐसा भी पार्ट होना चाहिए जिसमें की खुद सोचने की जरूरत पड़े जितना हमने पढ़ाया हमने लिखा है उसका कुछ एप्लीकेशन हो उसमें से कुछ आपको कुछ और करना पड़े अपनी तरफ से तब आप उसको लिखे यह है लेकिन यह जो अब एआई का जमाना आया उसके अंदर में इस सोच कर के निकालने की जरूरत घट रही है अब ये सोच के निकालने की जरूरतें घट रही है अब होमवर्क कोई मिलता है तो वो होमवर्क का जवाब एआई मुझे बता देता है कि क्या है और उसके भी आगे बढ़ कर के केवल जवाब ही नहीं बता देता अगर हमने उसको कीवर्ड्स बता दिए निबंध लिखना है पहले हम लोग गाय पर बहुत निबंध लिखा करते थे लोग कहते थे गाय पर निबंध लिखो तो हम सोचते थे कि गाय पर कौन सी पेंसिल चलेगी जिससे कि गाय पर निबंध लिखा जाए हम लोग तो कागज पर निबंध लिखना जानते हैं गाय पर निबंध लिखने को काय को कहा जा रहा है हमसे लेकिन अब आपको गाय पर निबंध लिखने के लिए कुछ भी सोचने का जरूरत नहीं है आप बना दो कि गाय पर निबं चाहिए तो लिख करके पकड़ा देगा आपको और आप कर दोगे एक कवर डिजाइन करना है किताब का कवर डिजाइन करना है बढ़िया सा डिजाइन करना है तो डिजाइनर सोचा करते थे ना कैसा अच्छा लगेगा यह ऐसे करू इधर करू इधर का रंग लगाऊ उधर का करू वो करू वो करू लेकिन अब आप एक बेसिक उसको बता दो कि हा किस चीज के लिए डिजाइन करना है किस तरह की किताब है किस तरह का आपको दृश्य चाहिए सारा पेंटिंग पेंटिंग होकर रंग वंग होकर के और सारे एक्सप्रेशन जैसा चाहिए आपको वह करके आपके सामने में व आ जाते हैं तो उससे क्या होता है कि क्या हो रहा है कि सोच नहीं पाते हम सोचने की क्षमता का अपॉर्चुनिटी नहीं दे रहे सोचने की अवसर नहीं दे रहे हम तो एक शॉर्टकट रास्ते दिखा दिए कि हां व यह कर लो वो कर लो वो कर लो तो पूरा सोचना बाधित हो रहा है समस्या जो है वो है जेईई के क्वेश्चन एक एक क्वेश्चन जो होते थे आईआईटी जेई के वो एक एक साल तक एक रिसोर्स मटेरियल के तरह काम आते थे उस एक सवाल को लेकर के और उसमें जो कांसेप्ट होते थे उन कांसेप्ट को हम लोग बच्चों के साथ में डिस्कशन करके थोड़ा हायर ऑर्डर तो रहता ही था वहां पे तो लंबे समय तक वो क्वेश्चन हमारा एक रिसोर्स मटेरियल होता था जिससे कि हम लोगों को काफी सारे कांसेप्ट समझाते या कनेक्ट करना सिखाते थे या कैसे सोचना है वह सिखाते थे लेकिन आज परीक्षा हुई अगले दिन तमाम साइट के ऊपर सबके सलूशन मिले पड़े हुए हैं हर कोई व सलूशन देखता है अच्छा अच्छा हमने तो यह लिखा था इसमें ऐसा होता है य कहानी खत्म है एक दिन के अंदर में कहानी खत्म है अब वो रिसोर्स मटेरियल नहीं है हमारे लिए क्योंकि सबको उसका सलूशन अच्छा खराब गलत सही यह भी तो है नाई सही देगी क्या जरूरी है क्या जरूरी है तो अच्छा खराब और वो तो स्टेटिस्टिक्स है और ज्यादातर लोग तो गलत जवाब देते हैं ना अगर कोई बात होती है तो ज्यादातर लोग गलत जवाब देते हैं थोड़े से लोग सही जवाब देते हैं ई क्या करेगा स्टेटिस्टिक्स करेगा जो ज्यादा वाले जवाब है उन्हीं को प्रमुखता से आगे लेकर के आएगा तो सही है कि गलत है वह भी भगवानी भरोसे है लेकिन हमने हमारी जो अवसर थे हमारे पास सोचने के जो अवसर थे व अवसर कम होते जा रहे हैं इस इस चक्कर में इस एआई के चक्कर में तो एक यह बड़ी चुनौती है शिक्षा के क्षेत्र में और दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि हमारे स्कूल सिस्टम्स का रेवेंस कम हो रहा है खास करके बड़े शहरों में बड़े शहरों में हमारे स्कूल सिस्टम की जो उ उपयोगिता है उपादेयता है वो घट रही है और वोह किसके कारण से रही है तो तमाम प्रकार के जो महिमा मंडन किया जा रहा है दो चार क्षेत्रों का मैनेजमेंट होगा एमबीए कर लो या मेडिकल होगा डॉक्टर बन जाओ या इंजीनियर बन जाओ जेई पास कर लो ऐसे दो चार पांच क्या क्लट कर लो ऐसे दो चार पांच क्षेत्रों का इतना महिमा मंडन हो रहा है और उसमें भी खास करके जेई और एन डबल ईटी शहरों के अंदर में बड़े शहरों के अंदर में और इस प्रकार का एक वातावरण पैदा किया जा रहा है कि अगर आपने इनमें से कुछ कर लिया इनमें से कुछ कर लिया तो जो आपका जीवन है वो पूरा गुलाब की खेती है मस्त उनकी महक लेते रहोगे जिंदगी भर मस्त रहोगे सुखी रहोगे जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ा मित है और अगर उसको नहीं किया तो आप कहीं के नहीं रहोगे तो आप कहीं के नहीं रहोगे इस प्रकार का जो एक क्रिएट किया गया है वातावरण क्रिएट किया गया है और वो तो ठीक है उनकी मार्केटिंग की अपनी टेक्नोलॉजी होती है बिजनेस की अपनी टेक्नोलॉजी होती है एमबीए लोग करते इसी के लिए हैं कि वो कैसे कैसे करके व मैनेजमेंट कर सके और इसलिए वो इस प्रकार का करने में सफल हो रहे हैं कोई आश्चर्य की बात नहीं हमारा देश तो ऐसा है कि हम क्याक नहीं कर लेते हैं हम क्याक क्याक नहीं बेच लेते हैं हम ऐसी ऐसी क्रीम भी बेच लेते हैं जो कहती है कि ये बस हफ्ते भर लगा लो और काले से गोरे हो जाओगे नाम बदल दिया ना आजकल पहले तो नाम में ही लिखा था वैसा हां पहले नाम में ही वैसा लिखा था आजकल नाम बदल दिया है उन्होंने में वो भी बिक जाती है वो भी बिक जाती है कुछ भी बिक सकते हैं यहां पर और वो उनकी सफलता है वो उनकी सफलता है कि वो उसको भी बेच सकते हैं हमने भी एक बार ऐसे ही कहा था अपने पब्लिशर को उनकी एक किताब में भयंकर भूल थी मैथमेटिक्स की किताब के अंदर में तो हमने उनको यही कहा था कि आपकी जो मार्केटिंग टीम है बहुत स्ट्रांग है आपके मार्केटिंग की स्ट्रेटेजी बहुत स्ट्रांग है तो बड़े खुश हुए कि मैं तारीफ कर रहा हूं लेकिन उनको संचय तो जरूर हुआ कि कुछ दाल में काला तो उन्होने पूछा क्यों तो मैंने कहा आपकी जो क्लास इसकी नाइंथ की या ए की मैथमेटिक्स की किताब है उसके अंदर में कमरे की लंबाई चौड़ाई और ऊंचाई दी हुई है इतने मीटर इतने मीटर इतना मीटर और फिर बताया गया है कि अगर एक व्यक्ति का आयतन इतने मीटर क्यूब होता है तो इस कमरे में कितने लोग हटेंगे तो कमरे के आयतन को और मनुष्य के एक मनुष के आयतन से भाग लगाकर लिखा हुआ है कि इतने लोग हटेंगे उसके अंदर में आप समझ रहे हो ना या कमरे का जितना आयतन है जमीन से लेकर के छत तक में और इस किनारे से किनारे उसका एक एक सेंटीमीटर क्यूब जो है वो मनुष्य के शरीर से भरा हुआ है इसके एक मनुष्य का आयतन इतना कमरे का टोटल आयतन इतना कितने मनुष्य हटेंगे वो भी किताब बिक रही है वो भी किताब बिक रही है इतनी स्ट्रंग मार्केटिंग टीम है तो इसी प्रकार से यह जो मार्केटिंग टीम है य कोचिंग जगत की और खास करके जो बड़े ऑर्गेनाइज कोचिंग है जो बड़े ऑर्गेनाइज कोचिंग है उनकी खास करके क्योंकि उनके पास यह मेधा अधिक है मार्केटिंग टेक्नोलॉजी करना उनको मैनिपुलेट करना लोगों के माइंड को समझना उनके साइकोलॉजी को समझना उनको कैसे उनको किया जाए उनके पास ज्यादा रिसोर्सेस है उसके इस कारण से वो अब हमें कोचिंग से वैसे कोई समस्या नहीं है लेकिन समस्या इसलिए है कि इसके कारण से हमारा स्कूल सिस्टम बहुत कमजोर होता जा रहा है हमारा स्कूल सिस्टम बहुत कमजोर होता जा रहा है हमारे स्कूल सिस्टम में आप बड़े शहरों के लोग आप जानते हैं कि वो कुछ नए शब्द आए हैं इधर के कुछ वर्षों के अंदर में पहले हम लोग कभी नहीं सुनते थे नए शब्द आए हैं उसमें एक शब्द है डमी स्कूल आप बताओ स्कूल को भी डमी बना दिया स्कूल को डमी बना दिया डमी स्कूल ये क्या चीज होती है इसका क्या मतलब है जिस स्कूल के अंदर में मनुष्य का पूरा चरित्र का निर्माण होना है जिसके अंदर में मनुष्य की पूरी शक्तियों का निर्माण होना है उसमें आप एक सेक्शन बना रहे हो यह कौन से स्कूल है यह डमी स्कूल है यह क्या बला है भाई फिर एक नया शब्द सुनने में आता है नॉन अटेंडिंग स्कूल स्कूल भी कोई नॉन अटेंडिंग होते हैं क्या तो स्कूल है ही किसलिए जब उसम कोई अटेंड ही नहीं कर रहा है मेरा बच्चा उसको अटेंड ही नहीं कर रहा तोव है किसलिए स्कूल क्या उसका रिवेंस है क्या उसकी उपयोगिता है क्या कर रहा है वो स्कूल कुछ कर ही नहीं रहा है क्योंकि उसम अटेंडेंस ही नहीं है हमारे कानपुर के अंदर में बहुत सारे कॉलेजेस है जहां पर के अटेंडेंस ऑलमोस्ट नहीं के बराबर रहती है तो ये नो नहीं रहती है ठीक है कुछ कमजोरिया है लेकिन यहां तो एक नया पूरा वर्ल्ड कॉइन हुआ है नॉन अटेंडिंग स्कूल्स ये एक स्कूल की बात नहीं हुई है इट क्लास इट क्लास ज हाई स्कूल है प्राइमरी स्कूल है नॉन अटेंडिंग स्कूल है तो स्कूल सिस्टम ही खत्म हो रहा है स्कूल में किसलिए है इसलिए कि आपको बोर्ड में इम्तिहान देने के लिए फॉर्म भरने के लिए एक लीगल परमिशन मिले ट्स इट पढ़ने के लिए नहीं है चरित्र निर्माण करने के लिए नहीं है टीम स्पिरिट के लिए नहीं है लोगों से झगड़ा करने के लिए नहीं है टीचर और अगली पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच में संवाद स्थापित हो इसके लिए नहीं है कम्युनिकेशन हो दिल से दिल का कम्युनिकेशन हो बच्चे जब छछ आठ आ साल एक स्कूल के अंदर में रहते हैं तो शिक्षकों के साथ में एडमिनिस्ट्रेशन के साथ में उनकी जो बंडिंग होती है उससे जो समाज के अंदर में स्ट्रेंथ आती है व सब तो खत्म अटेंड ही नहीं कर नॉन अटेंडिंग और जो बहुत सारे एक तीसरा शब्द आया हाइब्रिड स्कूल हाइब्रिड स्कूल कि व स्कूल में आओ क्लासेस अटेंड करो कोचिंग के लिए फिर से आपको दोबारा जाना नहीं पड़ेगा क्योंकि वो बहुत टैक्सिंग है वो बहुत ही टैक्सिंग है आप अगर कहो कि नहीं नहीं अच्छे बच्चे हो ना स्कूल जाना चाहिए नॉन अटेंडिंग नहीं तो स्कूल जाओ है तो एक्सपेरिमेंट करो उनके रिपोर्ट्स लिखो होमवर्क करो और उसके साथ में तीन चार घंटे के लिए कोचिंग जाओ उनके अलग से वर्कशीट लेकर के आओ वो करो बीच में खाने का समय नहीं है खेलने का समय नहीं है कूदने का समय नहीं है य किसी रिश्तेदार के यहां जाने का समय नहीं है कोई रिश्तेदार आया तो उससे मिलने का समय नहीं है आप ऊपर ही रहना ऊपर ही रहना नीचे मत आना चाची आ रहे हैं आप ऊपर ही रहना पढ़ाई करते रहना तो ये जो तरह-तरह की जो समस्याएं हैं इसके कारण से और लोग फिर स्कूल से नाम ही कटा करके और जो उधर चले जाते हैं हैदराबाद और कोटा और कहां कहां और सो कॉल्ड उन्होंने अपने दमी स्कूल खोल के रखे हुए हैं तो अपना पूरा स्कूल सिस्टम अगर सोचो कि क्रैश कर जाए तो भारत का क्या होने वाला है शिक्षा की यही खास बात है कि हर क्षेत्र के लोग इसमें से होकर गुजरते हैं भले ही आपको फाइन आर्ट्स करना हो भले आपको वकालत करना हो भले आपको बिजनेस करना भले ही आपको प्रोफेसर करना हो भले आपको रिसर्च करना हो आपको कुछ भी करना हो किसी भी तरह का का स्किल करना है आपको आपको एडमिनिस्ट्रेटर चाहिए आपको यूपीएससी करके और डीएम अच्छे डीएम होने चाहिए अच्छे एसएसपी होने चाहिए कुछ भी हर एक क्षेत्र सबको इस शिक्षा के इसमें से गुजरना है सबको पहली दूसरी चौथी आठवी दसवीं क्लास करनी है 12वी क्लास करनी है फिर कहीं ना कहीं से ग्रेजुएशन करना है कहीं कहीं से पोस्ट ग्रेजुएशन करना है तो सबको यहां अगर गड़बड़ होगी तोव सबको प्रभावित करने वाला है जिस तरह रूट है अपने पेड़ों के जो जड़ होती है रूट होती है वो रूट अगर कमजोर हुई उसमें अगर दमक लगी उसमें अगर पानी नहीं मिला उसम अगर हुआ तो वो एक एक पूरा पेड़ जो है वह सूखने वाला है तो शिक्षा का अपना एक स्थान उस प्रकार का भी है और इसको अगर इतना डैमेज किया जाएगा और हाइब्रिड स्कूल की हम बात करते हैं हाइब्रिड स्कूल में कि वो बाहर से आपको जेई पढ़ाने वाले कंपटीशन पढ़ाने वाले नीट पढ़ाने वाले वहां पर लाए जाएंगे और उनको रखा जाएगा यहां पर स्कूल के अंदर में और स्कूल का जो टाइम टेबल है जो भी है 9:00 बजे से 2 बजे न बजे जो भी है उसी के अंदर में आपको स्पेशल क्लास उनकी हो एक सेक्शन अलग हो जाएगा साइंस के सब्जेक्ट वो लोग पढ़ाएंगे और बाकी के सब्जेक्ट आपके स्कूल के रेगुलर जो लिस्ट पर है रोल पर है वो शिक्षक पढ़ाएंगे ये हाइब्रिड स्कूल का मॉडल है तो अच्छा लगता है बच्चों के हिसाब से कि चलो भाई बच्चों को कम से कम शाम के समय में अपना घर में सेल्फ स्टडी का भी टाइम है या अगर वो कुछ बैडमिंटन वगैरह खेलना चाहते हैं तो खेल ले रस्सी कूदना चाहते हैं तो कूद ले तो अच्छा सुनने में अच्छा लगता है लेकिन आप यह भी सोचो साथ में कि आप अपने शिक्षकों को क्या संदेश दे रहे हो ऐसे स्कूल में उनके शिक्षकों को क्या संदेश दिया जा रहा है उनके शिक्षकों को यह बताया जा रहा है कि जो तेज बच्चे हैं सो कॉल्ड जो कि कंपटीशन वाले सेक्शन में है उनको आप नहीं पढ़ा सकते हो आपके बस की बात नहीं पढ़ाना हमें बाहर से लेकर आना पड़ तो आप किसके लिए हो उन बच्चों के लिए हो जिनकी बुद्धि थोड़ी कम है तो आपकी भी उतनी ही बुद्धि है आप उन्ही को हैंडल कर सकते हो बाकियों को आप कर नहीं सकते बड़े बड़े स्कूलों के अंदर में बड़े बड़े स्कूलों के अंदर में यह व्यवस्था चल रही है सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था चल रही है जवाहर नवोदय विद्यालय में यह व्यवस्था चल रही है अब आप सोचो जब शिक्षकों को हम ऐसा डि मोरलाइज करके रखेंगे और इस प्रकार का उनको हम इंजेक्शन देते रहेंगे रोज के रोज रोज के रोज रोज के रोज रोज के आप किसी काम के नहीं हो आप किसी काम के नहीं हो क्या होने वाला है और तीसरी जो समस्या है वह है कि हमारे यहां शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही यह भर्ती नहीं हो रही मैं राजनीतिक वक्तव्य नहीं दे रहा कि व पोस्ट नहीं निकल रही है सिलेक्शन नहीं हो रहा है भर्ती हो रही है होती ही होंगी हम उसको देखते भी नहीं है क्या होती है क्या नहीं होती है स्कूल कॉलेजेस में शिक्षक दिखते तो है ना तो भर्ती होती है तभी तो दिखते हैं हा सरकारी स्कूलों के अंदर में कहीं कहीं पर होंगे कि भाई शिक्षक कम है विद्यार्थी ज्यादा है वगैरह वगैरह लेकिन ये जो शिक्षक है जो है उनमें से कितने शिक्षक है कितने उसमें से शिक्षक हैं अगर कोई शिक्षक अपने क्लास के लिए समर्पित नहीं है अपने बच्चों के लिए समर्पित नहीं है अपने अपने पढ़ाने के स्टाइल में और कुछ नवीनता लाने के लिए समर्पित नहीं है तो हम कहेंगे कि वह भर्ती नहीं हुई शिक्षक की भर्ती नहीं हुई किसी और की भर्ती हो गई शिक्षक के पद पर किसी और की भर्ती हो गई और ये दिख रहा है ये दिख रहा है एक बड़ी संख्या में हमारे शिक्षक जो हैं वो अभी के जनरेशन के अंदर में जो थोड़े पुराने उम्र के लोग हैं उनसे उनको यह बहुत पीड़ा सालती है हमारे शिक्षक ऐसे थे और हमारे शिक्षक ऐसे थे और अभी के शिक्षकों को हम देख रहे हैं कि ऐसे हैं तो स्टैटिस्ट कली क्योंकि स्टेटिस्टिक्स में हमेशा वेरिएशन होते हैं तभी वह वेरियंस निकाला जाता है स्टैंडर्ड डेविएशन निकाले जाते हैं यह सब किए जाते हैं तो वेरिएशन होंगे मैं केवल उसकी बात नहीं कर रहा लेकिन जो एक एवरेज है जो साधारण देखने में आ रहा है कुछ कुछ आइसोलेटेड पीक्स को छोड़ कर के कुछ कुछ आइसोलेटेड पीक्स को छोड़ कर के हमारे शिक्षक अब शिक्षा के प्रति अपने विषय के प्रति अपने विषय के प्रति उतने समर्पित नहीं दिख रहे हैं हम तो इसके कारण से एक एक बहुत विचित्र सा कंडीशन निर्माण होता चला जा रहा है जिसमें पूरा भारत इफेक्ट हो रहा है दिखे या ना दिखे लेकिन यह हमारा स्कूल सिस्टम इन कारणों से अच्छे बेस्ट ब्रेस हमारे एजुकेशन में टीचिंग के अंदर में नहीं आ रहे हैं मैं तो जहां भी जाता हूं आई सर जाऊं आईआईटी जाऊ कहीं भी जाऊं जो हमें विद्यार्थी मिलते हैं पढ़ने वाले बैचलरस करने वाले बीटेक करने वाले जो भी विद्यार्थी मिलते हम सबको बड़े जोर शोर के साथ में कहते हैं कि बेस्ट ब्रेस को टीचिंग में आना जरूरी है यह हमें चाहिए इंजीनियर बड़े बड़े इंजीनियर चाहिए हमें बड़े बड़े हमें मेडिकल रिसर्चर चाहिए हमें बड़े-बड़े एंटरप्रेन्र्दे है बेस्ट ब्रेंस को यहां आना चाहिए बाकी के काम नेक्स्ट बेस्ट वाले चला ले सकते हैं यह वाला काम नेक्स्ट ब्रेन नेक्स्ट बेस्ट वाले नहीं चला सकते हैं इसके लिए बेस्ट बन को आना ही चाहिए इस इस संदर्भ में मैं कह रहा हूं कि हमारी सिस्टम में शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही है जिनको होना था रिसर्चर जिनको होना था हमारे टीचर वह न जाने किस जहां में खो गए और हम तो भरी दुनिया में तन्हा रह गए तो ये सब समस्याए है तो अपना शिक्ष पान जो है वो एक छोटा सा मॉडल क्रिएट कर रहा है क् स्केल अप करना भारत बहुत बड़ा है भारत की समस्या सुलझाना यह हमारे बस की बात नहीं है और हम उसको टारगेट भी नहीं कर रहे ट लेकिन एक ऐसा मॉडल अगर हम खड़ा कर सकते हैं छोटे से क्षेत्र के अंदर में ज्योग्राफिकल जरूरी नहीं है छोटा क्षेत्र मतलब कहीं कहीं दूसरे लोग जो बैठे एक ग्रुप एक ग्रुप एक छोटे से ग्रुप के अंदर में अगर हम एक ऐसे मॉडल खड़ा कर सकते हैं जिसमें कि जो हमारे स्टूडेंट्स है जो हमारे बच्चे हैं वह केवल इसके लिए नहीं स्कूल जाए बहुत अच्छा स्कूल होगा तो उसका क्या होगा कि रे बड़ी अच्छी पढ़ाई होती है वहां पर शिक्षा केदम समय पर आते हैं लेबोरेटरी समय पर होती है बहुत बढ़िया स्कूल है यह है लेकिन उसमें भी आप देखोगे ना ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट एवरी वेयर हमने इतना अच्छा पढ़ाया इतना अच्छा पढ़ाया इतना अच्छा पढ़ाया कि बच्चों को सब समझ में आ गया तो हमने क्या बनाया बच्चे को हमने बच्चे को फॉलोअर बनाया मुझे फॉलो करो मुझे फॉलो करो मैं बता रहा हूं मेरी बात समझो मेरी बात मानो मेरे बताए रास्ते पर चलो तो जहां हो भी रहा है ना अच्छे से अच्छे स्कूल मैं बहुत उनकी प्रशंसा करूंगा कि आज की तारीख के अंदर में उनके शिक्षक इतना पेन ले रहे हैं और इतना समर्पण दिखा रहे हैं कि एकदम बिल्कुल मजबूती के साथ क्लास ले रहे हैं और उसको डिलीवर कर रहे हैं अपनी पूरी ताकत उसके अंदर में लगा रहे हैं लेकिन आप यह भी तो सोचो कि अल्टीमेटली हम अपने स्टूडेंट्स को केवल इंफॉर्मेशन ही तो पास कर रहे ना ज्यादा से ज्यादा उनको हम अंडरस्टैंड करा रहे हैं उनको हम लीडर नहीं बना रहे उनको हम फॉलोवर बना रहे किताब में लिखा है उसको फॉलो करो एनसीआरटी में लिखा है उसको फॉलो करो यूपी बोर्ड की किताब में लिखा है उसको फॉलो करो टीचर ने बोला है उसको फॉलो करो हम उनको लीडर नहीं बना रहे और हम लीडर क्यों नहीं बना रहे इतने इतने समर्पित शिक्षक उनको लीडर क्यों नहीं बना पा रहे इसलिए कि उनमें भी नवीन शोध करना एजुकेशन के सिलसिले में भी या कोई भी चीज एक सवाल बनाना एक अच्छा सा प्रश्न अ क्रिएट करना एक अच्छा सा न्यूमेरिकल प्रॉब्लम क्रिएट करना एक अच्छा सा क्वेश्चन पेपर क्रिएट करना ये क्रिएशन जो है यह क्रिएशन नहीं कर पा रहे हमारे बहुत समर्पित शिक्षक है बहुत समय लगा रहे हैं बहुत रेगुलर है लेकिन ये क्रिएशन नहीं हो रहा है जो है उसको अच्छी तरह से प्रेजेंट कर रहे तो जब वो खुद से क्रिएट नहीं कर रहे हैं तो खुद वो खुद भी फॉलो ही कर रहे हैं ना जो टेक्स्ट बुक्स है उनको फॉलो कर रहे हैं जो जो और बाकी जगह इंफॉर्मेशन है उसको फॉलो कर रहे हैं तो जब हम फॉलो करेंगे तो हम फॉलो ही फॉलोवर ही बना सकते फिर हम लीडर नहीं बना सकते तो अपने य शिक्षा सोपान में विविध प्रकार के कार्यक्रम करके हम लोग शिक्षा के क्षेत्र के अंदर में छोटे विद्यार्थियों से लेकर रितेश जी ने अने बताया कि नाइंथ क्लास के विद्यार्थियों पर हम लोग छ विद्यार्थी बैठे हैं यहां पर लेकिन इन छ विद्यार्थियों के लिए पूरी टीम लगी पड़ी है इन छह विद्यार्थी ये हम हम मॉडल विकसित कर रहे हैं इज इट डूबल क्या हो सकता है आप सतत प्रयास करो लोगों को लीडर बनाओ फॉलोवर बनाओ सेल्फ थिंकर बनाओ खुद से सोच सके ऐसी क्षमता विकसित करो कैसे करेंगे तो हम क्लास नाइंथ के एट के छ के स्टूडेंट से लेकर के रुचि जागृत तो करना तो जरूरी है ना सबसे पहले अगर किसी विषय के बारे में आप सोच उसको सोच वाना चाहते हैं तो उसमें उसका इंटरेस्ट क्रिएट होना चाहिए क्यूरियोसिटी आनी चाहिए कहीं सरप्राइज के एलिमेंट लिखना चाहिए कहीं पर तो होना चाहिए अरे ऐसे कैसे हो सकता है ये क्या हो गया तो उस तरह की सिचुएशन क्रिएट करना उस तरीके के एक्सपेरिमेंट डिजाइन करना और उस प्रकार के प्रेजेंटेशन डिजाइन करना उत्तर नहीं बताना उन उत्तर की तरफ उनको थोड़ा सा ड्राइव करके छोड़ देना सेल्फ थिंकिंग के लिए उनको मौका देना यह जो मॉडल है जिसमें कि टीचर्स के साथ भी हम यही कर रहे हैं टीचर्स को भी हम ऐसे ऐसे सिचुएशन क्रिएट करके और कोशिश कर रहे हैं कि वह कुछ क्रिएशन की तरफ आगे बढ़े क्रिएशन की तरफ आगे बढ़े तो ऐसा विद्यार्थियों के साथ में स्टूडेंट्स के साथ में और टीचर्स के साथ में और जो भी लोग शिक्षा जगत के साथ में जुड़े हुए एडमिनिस्ट्रेशन होंगे प्रिंसिपल्स होंगे उनके सबके साथ में मिलकर के अब इस इस कैंपस के और एक पाछ किलोमीटर के अंदर में रितेश जी और हमारे अतुल जी और इन सब की जो टीम है इन सबने मिलकर के और पिछले जो ये परीक्षा हुई जिसके के लिए आप लोगों ने कई सारे लोग उसमें इन विजले वगैरह में शामिल हुए इतने सारे स्कूलों के प्रिंसिपल्स को इतने सारे स्कूलों के मैनेजमेंट कमेटी के लोगों को ओरिएंट किया उन्होंने इसके बारे में उन्होंने ये किया तो तरह-तरह के वर्कशॉप तरह तरह के हम लोग जा कर के बहुत बार लोगों को बुला कर के बहुत बार इस प्रकार का सारा काम यहां पर शिक्षा सुफान के माध्यम से कर रहे और इसी के अंदर में सभी की शक्तियों का व चाहिए अपने को जोड़ चाहिए अभी 22 दिसंबर की बात यहां कुछ कह रहे थे क्या अभी कह रहे थे ना हा हर हर काम को एक उत्सव की तरह लेना समस्याए बहुत सारी है लेकिन व समस्याओं के कारण अपने को टेंशन नहीं होना चाहिए इतनी समस्याओं में हम घिरे हुए कितना टेंशन है मुझे वो नहीं चाहिए अपने को अपने को सारी समस्याओं का विवेचना करनी है समझना है उसके लिए हमको प्रयास करने हैं उनको कम करने के लिए उनको दूर करने के लिए और खुद को टेंशन में नहीं डालना है क्योंकि जैसे ही खुद को टेंशन में डाला हमने हम यह सब काम करने के लिए हमारी शक्तियां बहुत कम रह जाएंगी हां तो बड़े उत्साह पूर्वक बड़े उत्सव के वातावरण के साथ में हमें ये सारे काम करने हैं ये सारे टेंशन वाले काम जो है वो हमें बहुत खुश हो कर के करने हैं बहुत उत्साह में आकर के करने हैं अब ये जो 1 स कॉपिया आई है लिख कर के उनकी जांच करनी है 1 स कॉपिया जो स्कॉलरशिप टेस्ट की लिख कर के आई है जिसके लिए आप लोगों ने इलेशन वगैरह किए हैं उसकी जांच करनी है अब हम इसको भी एक अवसर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं इसका भी हम एक सेलिब्रेशन इसको भी करने की कोशिश कर रहे हैं उत्सव करने की कोशिश कर रहे हैं हम कर सकते थे बैठे बैठे अपना जाते अपना हो जाता 10 15 दिन एक महीने के अंदर में दो महीने के अंदर में हो जाता है हमें अभी कोई जल्दी भी नहीं है स्कॉलरशिप अगले साल देनी है लेकिन नहीं हमने यह प्लान किया है कि कहीं ना कहीं इस पूरे को एक उत्सव में बदला जाए लो अब अगले सवार को हम लोगों ने एक देखते हो पाता है या नहीं हो पाता है मालूम नहीं कि सारे लोग जो है जो भी लोग ये क्लास पांच के क्लास आठ के क्लास 10 के बच्चों के इम्तहान हुए तो क्लास पांच के बच्चों के जो गणित के प्रश्न है उनको जांचना है उनकी भाषा के लिए कुछ प्रश्न है उनके उनको जांचना है इसी तरह से आठवी क्लास में दसवीं क्लास में गणित है विज्ञान है कुछ भाषा है उनको जांचना है तो बहुत सारे लोग मिलकर 10 15 20 40 30 लोग मिलकर के और सवेरे रविवार को आ जाए यहां पर बढ़िया सा लंच कराया जाए यहां पर सबको और एक साथ बैठ कर के कॉपिया जाती जाए खूब सारा वहां नमकीन मकीन पढ़ रहे सब पढ़ा रहे चाय वाय हर आधे एक घंटे के ऊपर आती रहे और फिर एक कोई क्वेश्चन कोई कॉपी उठाए और उसमें बच्चे ने कौन सी बेवकूफी वाली बात की है उसको पढ़ के सुनाए और बाकी सब लोग हा हा हाहा करें और इस वातावरण के अंदर में यह कॉपिया जाचे और ऐसे करते हुए हम कई इस प्रकार के सेशन लेकर के अपने इस टास्क को पूरा करें ये क्रिएशन है देखो यह भी क्रिएशन है यह हमने सोचा सोचने की शक्ति होगी तो आप बहुत कुछ करोगे और सोचने की शक्ति नहीं होगी ना तो आप ई ढर प चलोगे अच्छा हो गया चलो भाई जाच आओ भाई रितेश जी बैठो अमित जी बैठो आप जी बैठो तुम जी बैठो आ 10 पाच सात लोग बैठ कर के और व बड़ा टेंशन भी है 1 स कहां से इतने सारे क्यों ले आए भ इ अच्छे खासे 600 700 होते थे जल्दी से काम खत्म हो जाता था यह भी एक सोचना है हर जगह नई चीज सोचना है सोचने की शक्ति दिमाग में पैदा करनी है और यह जो फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी मैथमेटिक्स सोशल साइंस हिंदी इंग्लिश जो है ना ये सारे उसके माध्यम हो सकते हैं सोचने की शक्ति पैदा करना यह मेन टारगेट है यह मेन टारगेट है सोचने की शक्ति पैदा करना ये मेन टारगेट है माध्यम कैसा कहीं कुछ तो माध्यम लेकर चलना पड़ेगा ना ऐसे थोड़ी स्विच दबाए और सर्किट चलाएंगे तो शक्ति तो नहीं उत्पन्न नहीं होगी तो ये सब जो विषय है वो हमारे माध्यम है उनमें से हम जो भी विषय हम कर रहे हैं जिस भी विषय से काम कर रहे हैं एक बार वह थिंकिंग पावर डेवलप हो जाए तो उस व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास को भी कोई नहीं रोक सकता और सामूहिक विकास जो समाज का है उसको भी कोई नहीं रोक सकता तो इस पूरी भूमिका के साथ यहां पर तरह-तरह के कार्यक्रम होते हैं और आप सारे लोगों से जितना जिस प्रकार से जुड़ सकते हैं जितना जिस प्रकार से इस यज्ञ में आहुतियां डाल सकते हैं आप करें अमित जी हमारे उनके संपर्क सूत्र सबके पास साधारण रहते हैं और सबके उनके पास रहते हैं तो मिलकर के और तरह-तरह की योजनाएं करते रहे और काम करते रहे थैंक यू वेरी मच
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