35-Surah Fatir

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Curated by: Mufti Abdur Rauf Sukkurvi Official (5 videos)


Currently Playing: Dars-e-Quran Kareem Surah Fatir V15-26 | Mufti Abdur Rauf Sukkurvi | 07-12-2024

درس قرآن کریم ____________________________________ سورہ فاطر 15 سے 26 حضرت مولانا مفتی عبــــــــدالرٶف سکھــــروی صاحب مدظلہ جامع مسجد جامعہ دارالعلوم کراچی بـــروز ہفتہ بتاریخ 4 جمادی الثانیہ 1446ھ مطابق 7 دسمبر 2024 __________________________________

Video Transcript

अला ल आलमीन तला रस करीम मोहम्मद वा अमा बाद बिल्ला मता रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम यानाला ला हम जदी मालि काला ला ला इनमा मनत का फ ला ब नर र ला म इला नर इना सना ब बशर नम लाला फया जास ब बना किता सु कनकी सला सूर फतिया नंबर 15 से 26 तक है 15 से लेकर 26 तक की आयात है इन आयात का तर्जुमा यह है लोगों तुम सब अल्लाह के मोहताज हो लोगों तुम सब अल्लाह के मोहताज हो और अल्लाह बे नियाज है और अल्लाह बे नियाज है हर तारीफ का बजत खुद मुस्तक है हर तारीफ का बजत खुद मुस्तक है अगर वह चाहे तो तुम सबको फना कर दे और एक नई मखलूक वजूद में ले आए और यह काम अल्लाह के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है और कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा और कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा और जिस किसी पर बड़ा बोझ लदा हुआ हो वह अगर किसी और को उसके उठा ने की दावत देगा तो उसमें से कुछ भी उठाया नहीं जाएगा चाहे वो वो जिसे बोझ उठाने की दावत दी गई थी कोई करीब रिश्तेदार ही क्यों ना हो ऐ पैगंबर तुम उन्ही लोगों को खबरदार कर सकते हो जो अपने परवरदिगार को देखे बगैर उससे डरते हो और जिन्होने नमाज कायम की हो और जो पाक होता है वह अपने ही फायदे के लिए पाक होता है और आखिरकार सबको अल्लाह की तरफ लौट करर जाना है और अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हो सकते और ना अंधेरे और रोशनी और नसाया और धूप और जिंदा लोग और मुर्दे बराबर नहीं हो सकते और अल्लाह तो जिसको चाहता है बात सुना देता है तुम उनको बात नहीं सुना सकते जो कब्रों के पड़े हुए हैं और तुम उनको बात नहीं सुना सकते जो कब्रों में पड़े हुए हैं तुम तो बस एक खबरदार करने वाले हो तुम तो एक खबरदार करने वाले हो हमने तुम्हें हक बात देकर इस तरह भेजा है कि तुम खुशखबरी दो और खबरदार करो और कोई उम्मत ऐसी नहीं है जिसमें कोई खबरदार करने वाला ना आया हो और अगर यह लोग तुम्हें झुट रहे हैं तो जो काफिर इनसे पहले थे उन्होंने भी रसूलों को झुट आया था उनके पैगंबर उनके पास खुली खुली निशानिया लेकर सही फे लेकर और रोशनी फ आने वाली किताब लेकर आए थे फिर जिन लोगों ने इनकार की रविश अपनाई थी मैंने उन्हें पकड़ में ले लिया अब देखो मेरी सजा कैसी होल नाक थी अब देखो मेरी सजा कैसी होल नाक थी यह है इन आयात का तर्जुमा इसमें सबसे पहले अल्लाह पाक ने फरमाया है कि ऐ लोगों तुम सब अल्लाह ताला के मोहताज हो और अल्लाह ताला बे नियाज है जिसमें किसी शक शुबे की कोई गुंजाइश नहीं है हकीकत में अल्लाह जल शन के सारे ही मोहताज है सारी मखलूक अल्लाह ताला की मोहताज है और अल्लाह ताला किसी के मोहताज नहीं अल्लाह ताला अपनी जात के तबार से बे नियाज है और वह समद है और बे नियाज है मखलूक उनकी मोहताज है जब मोहताज है तो मखलूक को और एक को और सब लोगों को अल्लाह ताला की तरफ रुजू करना चाहिए बीमारी की हालत हो तब भी सेहत की हालत हो तब भी फाके की हालत हो तब भी मालदारी की हालत हो तब भी हर हालत में सारे बंदे अल्लाह ताला के मोहताज है और अल्लाह ताला समद और बे नियाज है और दूसरी बात यह फरमाई कि अल्लाह ताला बसात खुद तारीफ के लायक है अल्लाह ताला बजाते खुद तारीफ के लायक है यानी अल्लाह ताला को ना बंदों की तारीफ की जरूरत है और ना बंदों की इबादत की जरूरत है कोई अल्लाह की इबादत करे या नाना करे कोई अल्लाह ताला की तारीफ करे या ना करे कोई अल्लाह ताला की हमद सना करे या ना करे अल्लाह ताला अपनी जात के तबार से लायक हमद है और वह खुद लायक तारीफ है वह किसी की तारीफ के मोहताज नहीं है जो बंदे अल्लाह ताला की हम करेंगे इसमें उन बंदों का फायदा है अल्लाह ताला कोई फायदा नहीं है क्योंकि वह बे नियाज है और तमाम तारीफों के बजाद खुद लायक है इसलिए किसी और के तारीफ के वह बिल्कुल भी मोहताज नहीं हम बंद बंदों का फायदा है कि वह अल्लाह ताला की इबादत भी करें अल्लाह ताला की मद सना भी करें अल्लाह ताला की तारीफ भी करें इसमें बंदों का अपना फायदा है लि करना चाहिए इसके बाद फरमाया के आखिरत में कोई बंदा किसी का बोझ नहीं उठाएगा अगर किसी पर बहुत ज्यादा बोझ लदा हुआ हो और वह किसी अजीज करीब रिश्तेदार को भी बुलाए कि भाई तुम भी इस मेरे बोझ के उठाने में मेरी मदद करो तो वह भी उसका बोझ नहीं उठाएगा जब नहीं उठाएगा तो बस अपनी अपनी फिक्र करनी चाहिए अब हर एक को अपनी अपनी फिक्र करनी चाहिए वो फिक्र ये करनी चाहिए कि दुनिया में रहते हुए दिल जान से अल्लाह ताला की ताब दारी करता रहे फरमा बरदारी करता रहे नाफरमानी से बचता रहे तब तो वह आखिरत में रहेगा कामयाब वरना आखिरत का दिन तो ऐसा नफ्सी नफ्सी का आलम होगा कयामत का दिन तो ऐसा नफसी नफ्सी का दिन होगा के करीब से करीब रिश्तेदार अजीज जो दुनिया में एक दूसरे के काम आते थे आखिरत में काम नहीं आएंगे क्योंकि हर एक को अपनी पड़ी हुई होगी हर एक य चाहेगा कि मेरी बख्श हो जाए मेरी मगफिरत हो जाए जब यह हाल है तो दुनिया के अंदर बस एक दूसरे के साथ भलाई का सोचे खैर खवाई का सोचे एक दूसरे की मदद अल्लाह की रजा के लिए करें क्योंकि ये सब अजर सवाब के काम है और अपना काम अपना पूरा कर अपना काम मुकम्मल करें यानी जो अल्लाह ताला का हुकुम है उसे बजा लाए और जो उनकी नाफरमानी की बातें उससे अपने आप को बचाते रहे अपना बोझ यही उतार ले व कयामत के दिन कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा और कोई किसी के पूरी तरह काम आएगा इसके बाद अल्लाह ताला फरमा रहे हैं र से के आप उन लोगों को डरा सकते हैं और उनको खबरदार कर सकते हैं कि जो बगैर देखे अल्लाह ताला से डरते हैं और नमाज कायम करते हैं उनको आप डराए तो डरेंगे और डर कर के अपने गुनाहों की माफी भी मांगेंगे तबा भी करेंगे ार भी करेंगे अल्ला ताला की फरमा बरदारी भी करेंगे लेकिन जो र में उनका जिक्र आगे आ रहा है वह नहीं माने फरमाते हैं पैगंबर आप लोगों को खबरदार कर सकते आप उन लोगों को खबरदार कर सकते हो जो अपने के बगैर उससे डरते हैं और जिन्होंने नमाज कायम की नमाज कायम करने का मैं कई मर्तबा मतलब बता चुका हूं के एक नमाज पढ़ना होता है एक नमाज कायम करना होता है नमाज नमाज कायम करने वाले बहुत कम है और नमाज पढ़ने वाले ज्यादा है तो अल्लाह ताला ने कुरान शरीफ में जहां भी हुकम दिया है नमाज कायम करने का हुकम दिया इसलिए हमें इसका एहतमाम करना चाहिए और हर नमाज चाहे जमाज से पढ़े और चाहे अकेले पढ़े खुशु खुजू से पढ़े आराम इत्मीनान से अदा करें और सुन्नतों का ख्याल रखते हुए अदा करें तो फिर इंशाल्लाह ऐसी नमाज ज्यादा अल्लाह ताला के यहां कबूल और बायसा अजर सवाब होगी आगे फरमाते हैं कि भाई जो भी पाक होता है वह अपने फायदे के लिए पाक होता है यानी जो आदमी नेक बनता है अल्लाह ताला का ताबे दार बनता है फरमाबरदार बनता है अल्लाह ताला की इबादत करता है उसकी नाफरमानी से बचता है इसमें उस बंदे का फायदा है अल्लाह ताला तो पहले बता दिया कि अल्लाह ताला तो बे नियाज होने तो हमारी किसी इबादत की कोई जरूरत नहीं है जब जरूरत नहीं तो वह हमारी इबादत के कतन मोहताज नहीं है हम मोहताज है जब हम मोहताज है तो बस अल्लाह ताला की इबादत और उसकी बंदगी करने में अल्लाह ताला कोई फायदा नहीं है फायदा है तो हमारा अपना ही है जब अपना फायदा है तो बस और ज्यादा ध्यान और तवज्जो से करना इसके बाद अल्लाह पाक ने फरमाया कि अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हो सकते अंधेरा और रोशनी बराबर नहीं हो सकते साया और धूप बराबर नहीं हो सकते मुर्दे और जिंदे बराबर नहीं हो सकते यह अल्लाह पाक ने इस आयत में बयान फरमाया है जिसका मतलब यह है कि कि जिन लोगों ने जिद की वजह से हट दरमी की वजह से जिद और हट दरमी की वजह से हक बान हक बात मानने से इंकार कर दिया है और हक बात को कबूल करने के तमाम दरवाजे उन्होंने अ खुद अपने ऊपर बंद कर लिए अल्लाह ताला ने पहले उनकी मिसाल द है जैसे अंधे उनकी मिसाल ऐसी जैसे अंधे और दूसरी मिसाल द अंधेरिया यह मिसाल उनके कुफर शिर्क की जो काफिर है उनकी मिसाल तो अंधों जैसी है और कुफर जो शिर्क है कुफर और शिर्क जो है इसकी मिसाल अंधेरिया की तरह है और उसकी जो सजा होगी कुफर की जो सजा होगी जिसमें को अजाब मुगत पड़ेगा जबरदस्त अजाब का सामना कर पड़ेगा उसको मिसाल दिए धूप से कि उसकी मिसाल ऐसी धूप तो जितने भी काफिर है उनकी मिसाल अंधों जैसी और उनके जो कुफरी आमाल उसकी मिसाल ऐसी है जैसे कि तारी किया और अंधेरिया और इसके नतीजे में जो खौफनाक अजाब लायक होगा उसकी मिसाल ऐसी है जैसे कि धूप य धूप अच्छी नहीं होती यह तो हो गया काफिरों की मिसाल इसके मुकाबले में ईमान लाने वाले बंदे तो जो नेक है मुत्त की है परहेज गार हैं अल्लाह ताला पर ईमान लाने वाले हैं अल्लाह ताला के पैगंबरों पर ईमान लाने वाले हैं नेक

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