ಸೀತೆ ಬಾಲ್ಯದ ಕಥೆ

Seethe Childhood Story

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Currently Playing: राजा दशरथ की अन्त्येष्टि। भरत द्वारा राजसिंहासन को ठुकरना | Seethe Full Kannada TV Serial | Ep - 149

#kannada #ramayan #seethe #jaishreeram राजा दशरथ की अन्त्येष्टि। भरत द्वारा राजसिंहासन को ठुकरना Title:- Seethe Episode:- 149 प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण और उनके स्वागत के प्रति उल्लास एवं उत्साह व्यक्त करती हुई लिए तिलक की नवीन प्रस्तुति "हर घर मंदिर हर घर उत्सव"। भरत माता कैकेयी पर क्रोधित हैं तो शत्रुघ्न मंथरा को पीटते हुए महल से निकाल रहे हैं। उन्हें पता चल जाता है कि इस षड्यन्त्र के पीछे मंथरा की ही कुटिल बुद्धि है। भरत शत्रुघ्न को भैया राम का वास्ता देकर हिंसा करने से रोकते हैं। भरत बड़ी माता कौशल्या से मिलने उनके कक्ष में जाते हैं। कौशल्या भरत से उन्हें राम के पास वन में भिजवाने को कहती हैं। भरत इससे दुःखी होते हैं। वे माता कौशल्या से कहते हैं कि वे उन्हें भैया राम के पास वन नहीं भेजेंगे बल्कि राम को वन से वापस लायेंगे। भरत के मन में ग्लानि से है कि पापकर्म उसकी माता ने किया है किन्तु सम्पूर्ण विश्व उसे भ्रातद्रोही कहेगा। महर्षि वशिष्ठ भरत को शोक त्याग कर पिता दशरथ के पार्थिव शरीर का अन्तिम संस्कार करने का परामर्श देते हैं। पूरी अयोध्या नगरी अपने महाराज की अन्तिम यात्रा में शामिल होती है। दशरथ के सत्कर्मों की यादकर प्रजा उनकी जय जयकार करती है। भरत पिता की चिता को अग्नि देते हैं। जब अस्थि कलश को सरयू नदी में प्रवाहित करने की बारी आती है तो भरत भाव विह्वल होते हैं और कलश नदी में प्रवाहित नहीं कर पाते। वशिष्ठ उन्हें मोह त्यागकर विधान पूरा करने का उपदेश देते हैं। अगले दिन राजसभा में महर्षि वशिष्ठ और मंत्री परिषद भरत से राजसिंहासन सम्भालने को कहती है। सुमन्त कहते हैं कि राजा के बिना राज्य असुरक्षित रहता है। शत्रु हमला कर सकते हैं। तब भरत सवाल उठाते हैं कि जब यही सभा युवराज राम को राजा चुन चुकी थी और महाराज ने अपनी रानी के कहने पर युवराज को वन भेज दिया था तो किसी मंत्री ने इसके विरूद्ध आवाज क्यों नहीं उठायी। भरत कहते हैं कि ज्येष्ठ होने के कारण राम ही राजसिंहासन के अधिकारी हैं। भरत पूरी राजसभा को कहते हैं कि वो उन्हें राम को वन से वापस लाने में सहयोग करे। वशिष्ठ भरत की प्रशंसा करते हैं। भरत माता कौशल्या को भी साथ चलने के लिये राजी कर लेते हैं और कहते हैं कि वे वन में ही भैया राम का राज्याभिषेक करेंगे। रानी कैकेयी को भी अब अपनी गलती का अहसास है। वो भी पश्चाताप करने भरत के साथ वन जाने का अनुरोध करती है। कौशल्या के कहने पर भरत इस पर सहमत होते हैं। 3ಡಿ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ನಾವು ನಿಮಗೆ ಉತ್ತಮ ಗುಣಮಟ್ಟದ ಧಾರ್ಮಿಕ ವಿಷಯದೊಂದಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಗುರಿಯನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದೇವೆ ಮತ್ತು ನಾವು "ಸೀತೆ" ನೊಂದಿಗೆ ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತೇವೆ ದಯವಿಟ್ಟು ನಮ್ಮ ಚಾನಲ್ ಅನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸಿ ಮತ್ತು ಇಂತಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ವಿಷಯಗಳಿಗಾಗಿ ಚಂದಾದಾರರಾಗಿರಿ.


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